शनिवार, 10 अप्रैल 2010

ताऊयहाँपुर... कर्जत की गलियों में (पार्ट -4)

पार्ट-3 के लिए यहाँ जाएँ।

Disclaimer: इस कहानी के पात्र वास्तविक हैं....लेकिन सारी घटनाएँ और संवाद काल्पनिक हैं। हाँ इतना जरूर है कि संवाद लिखते समय मैने पात्र की भाषा और शारीरिक-भाषा दोनों का पूरा ध्यान रखा है। जैसे कि ताऊ का अंदाज वैसा हीं है..जैसा इस कहानी में मालूम पड़ता है। (All the characters mentioned in this story are REAL but incidents and dialogues are fictitious. Even then I have followed the body language and LANGUAGE of all the characters how they look and how they speak in real life. For example, Tau behaves the same way as I have portrayed him in this story.)

पिछली कहानी में बड़ा हीं भारी पाप हो गया मुझसे... मैंने जहाँ-तहाँ इधर-उधर कई सारे चिकन-मटन से परिपूर्ण शब्द डाल दिए थे, और उससे ये हुआ कि "आस्था" और "संस्कार" चैनल से चिपके रहने वाले बाबाओं और बाबा के भक्तों से मुझे इतनी लताड़ पड़ी कि दो महिने "नैतिकता" के अस्पताल में बिताने पड़े। उस अस्पताल में लैपटाप की तो कोई मनाही नहीं थी लेकिन मेरी अंगुलियों ने हाथ खड़े कर दिए। इतनी पिटाई उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। फिर सोचा कि किसी और से हीं लिखवा लेता हूँ, दिमाग और गला तो काम कर हीं रहे हैं, मैं बोलता रहूँगा और कोई लिखता रहेगा (लिखती रहेगी.. अगर ऐसा होता तो बात हीं कुछ और थी, लेकिन मैं बेमतलब के हवाई महल नहीं बनाता..... वैसे भी मेरा वजन ८१ किलोग्राम है, असली महल में बैठा तो वो टूट जाएगा फिर हवाई महल बनाके अपना हीं कबाड़ा क्यों करना)। सोच तो बेहद सही थी लेकिन तभी दिमाग ने विचारों के कारखाने पर ताला डाल दिया...और कहा कि तुमने अब तक जो भी सोच लिया, सोच लिया , अब सोचने की गलती भी मत करना... क्योकि तुम सही तो सोच नहीं सकते.. और ऊलूल-जुलूल सोचने चले तो अबकि बार ऐसा न हो कि कोई मुझे हीं उठाकर ले जाए और प्रयोगशाला में डाल दे, जिस तरह आईन्स्टीन के दिमाग को डाला हुआ है। आईन्स्टीन.. इतना सुनना था कि मैं अपने हीं दिमाग के सामने नतमस्तक हो गया क्योंकि मुझ तुच्छ को किसी ने सीधे न सही, घुमा-फिराकर हीं आईन्स्टीन तो कहा था, भले हीं वह मेरा हीं दिमाग हो। कुछ होता न देखकर मैं महिने बीतने का इंतज़ार करने लगा। दो महिने बीत गए, पिटाई की बातें पुरानी हो गईं और मैं थोड़ा चलने-कूदने लायक हो गया, लेकिन यह क्या.. बाबा के दूत फिर से अपनी लंगोटी थामे मेरे दुआरे आ गएँ और कहने लगे कि "बालक तुमने अपने पाप की सज़ा तो भुगत ली अब थोड़ा पश्चाताप भी कर लो। जाओ अगले एक महीने तक किसी भी "सविता भाभी" टाईप की वस्तु को देखना या छूना मत और ऐसी चीज़ों के बारे में किसी से कोई चर्चा भी न करना।" अब आप हीं बताओ कि मैं "ताऊयहाँपुर" लिखूँ और उसमें इन बातों का हीं ज़िक्र हीं न हो तो फिर लिखने का क्या फ़ायदा। इसलिए मैने एक महिने तक ब्रह्मचर्य-पालन का निश्चय किया और उस दौरान मैने किसी भी पराई स्त्री (वैसे भी मेरे लिए तो सारी स्त्रियाँ हीं पराई हैं) को बुरी नज़र से नहीं देखा... हाँ पूरी नज़र से ज़रूर देखा(सौजन्य: बाबा संजय मिश्रा उवाच.. गोलमाल रिटर्न्स)। तो भाईयों.. आज के दिन या फिर आज से २-३ दिनों बाद उस बाबा-दूत की मियाद खत्म हो रही है और इसी खुशी में मैं "ताऊयहाँपुर" की चौथी कड़ी लेकर हाज़िर हो रहा हूँ।

अब तक की स्थिति ये है कि ताऊ की फ़ंडापंथी और के की फ़ार्टपंथी बराबर चल रही है.. बीस्ट अपने में हीं मगन है, मणि कन्फ़्यूज्ड है कि कुछ बोलूँ या ना बोलूँ क्योंकि अगर कुछ भी बोला तो लोग गर्लफ़्रेंड-गर्लफ़्रेंड चिल्लाने लगेंगे.. रजनी "द ग्रेट रजनी" की तरह वर्तमान को लात मार के फ्यूचर को टार्चर कर रहा है.. यानि कि अभी एक ट्रेकिंग खत्म हुई नहीं कि अगली ट्रेकिंग के प्लान्स बनाने में जुट गया है.. और अब बचे दो इंसान "पीए" और "वीडी".. ताऊ के फ्लैटमेट्स होने के कारण इन दोनों का ऊपर का हिस्सा खाली हो चुका है. इसलिए इनसे इस बात की उम्मीद हीं नहीं की जा सकती कि ये लोग कुछ भी सोच रहे होंगे। और इन्हीं हालातों में ये सारे रेलगाड़ी से उतरने की जुगत में लगे हुए हैं और लगभग आधे घंटे से लाईन में खड़े हैं|आगे क्या होता है..आप खुद देख लीजिए ।


रेलगाड़ी के जनरल डब्बे में:

रजनी: बीस्ट... बात मान.. रूकवा दे ट्रेन
बीस्ट: स्साला... रूकवा देता.. लेकिन तुम लोग हमारा पावर नहीं जानता है, घूमा तो ट्रेन एक्सीडेंट हो जाएगा।
सब लोग एक साथ: ऊऊऊऊऊऊऊओ..... जे बात..
वीडी: कुछ बोला है!! तू तो दारा सिंह है बे.. दारा सिंह नहीं... वो तो बूढा हो गया. तू तो पाड़ा सिंह है बे...
के: क्या फ़ार्ट है.. पाड़ा सिंह?
वीडी: पाड़ा नहीं जानता... हमरे बिहार में भैंस के बच्चे को पाड़ा कहते हैं..
ताऊ: स्साला...फिर से बकर शुरू कर दिया.. चुप रहने का क्या लोगे?
वीडी: ताई...... हाहाहा
पीए: मचा दिया बे..
मणि: अरे..काहे पका रहे हो
वीडी: गुड कोश्चन..... नेक्स्ट कोश्चन.... हाहाहा
रजनी: वीडी की जय हो... कर दिए तुम्हारी जय-जयकार.....अब तो चुप हो जाओ
ताऊ: स्साले...हमारी तो जय-जयकार करते नहीं... फोकट में हीं चुप करा देते हो. अब से देखते हैं कौन हमको चुप कराता है
पीए: बीस्ट बोलेगा चुप होने को....तब भी नहीं होगा?
ताऊ: हम्म्म.. स्साला सोचना पड़ेगा.. ऐसा-ऐसा सवाल काहे पूछते हो.. अभी एक-दो मिनट खुश रह लेते तो तुम्हारा क्या जाता.
के: ताऊ की ले ली
ताऊ: चुप्प... क्या ले ली... हमको बीस्ट पर पूरा भरोसा है.. वो बस देखने में राक्षस लगता है. असल में है नहीं.. और वैसे भी बीस्ट तीन गलतियाँ माफ़ कर देता है और हमारा तो अभी खाता हीं नहीं खुला है
वीडी: स्साले.. तुम्हारे खाते का हिसाब तो हम रख रहे हैं.. दो दशमलव पाँच हो चुका है.. अभी आधा और गलती किया कि बीस्ट के हाथों धुल जाओगे... है ना बीस्ट?
बीस्ट: हमसे क्या पूछता है... और ये दशमलव क्या होता है..
ताऊ: बता.. साले बता... चला था हीरो बनने
वीडी: छोड़ो... अब फिर से फंडे कौन दे..लोग बोर हो जाएँगे..... बीस्ट.. दशमलव कुछ नहीं होता है.. हम अभी उसका आविष्कार किए हैं.. इसका मतलब जब हमको पता चल जाएगा तो तुमको भी बता देंगे. पीस मारो....
बीस्ट: स्साला.... दिमाग का दही कर दिया.. वीडी साले.... तू इतना बकर कैसे कर लेता है.... कोई कोर्स लिया था क्या?
वीडी: हाँ, लिया नहीं था.. ले रहे हैं.. आज भी उसका क्लास था... छूट गया... तो यहाँ पर उसी का रीविजन कर रहे हैं...
बीस्ट: स्साला... पागल कर देगा..
वीडी: ह्म्म.. "मोहे पागल कर दे" (धीरे से).. अच्छा ये बता बीस्ट..हम जहाँ जा रहे हैं वहाँ पर बाथरूम, ट्वाईलेट, बेड..ये सब होगा ना?
बीस्ट: तू तीरथ पे जा रहा है क्या.. चार धाम.. कुछ नहीं होगा वहाँ.. जंगल में पेड़ के पीछे बैठ जाना... समझा.
वीडी: और सोने का?
बीस्ट: स्साले.... हमारा माथा पर सो जाना......
वीडी: हम्म... गुड आईडिया. लेकिन तेरी खोपड़ी पे बाल तो है नहीं...स्लीप होके गिर गया तो... इसलिए आईडिया कैन्सील..
बीस्ट: पीए....पी.....ए..... इसको चुप करा.... हम सही में फोड़ देगा...
ताऊ: गलत में भी फोड़ता है क्या?
बीस्ट: तेरा नाम पीए है? ... साले तेरे को आईडेंटिटी क्राईसिस हो गया है क्या...
ताऊ: नहीं.... हाहाहा
पीए: स्सालों.... चु*यागिरी मत करो.. चुप हो जाओ..... बीस्ट को काहे तंग कर रहे हो... इसको तंग करने का जन्मसिद्ध अधिकर सिर्फ़ हमारा है
रजनी: आ गएँ एक और. ये तीनों फ़्लैटमेट्स जो हैं ना.. प्लान करके तुम लोग फ़्लैटमेट्स बने थे क्या... कहते हैं ना "राम मिलाए जोड़ी, एक अंधा एक कोढी". वही हाल है तुम तीनों का... बकर पे बकर.. मुँह बंद रखो सालों.
ताऊ: हम्म.... प.प..प..प
के: अब तेरे को क्या हुआ बे
ताऊ(मुँह खोल के): साले.... रजनी बोला..मुँह बंद रखने के लिए.. तो हम मुँह बंद करके बोल रहे थे...
बीस्ट: तुम सब साला.... हमको पता होता कि ट्रेकिंग में मेन्टली टार्चर करेगा... तो हम आता हीं नहीं... और ये साला.... ट्रेन रूक भी नहीं रहा..
रजनी: कैसे रूकेगा.. तुम घूमोगे तभी न रूकेगा... सही में रोक दो ट्रेन को.. हम भी फ़्रस्ट (फ़्रुस्त.. फ़्रस्ट्रेटेड) हो गया
बीस्ट: अब लगता है कि घूमना हीं पड़ेगा
पीए: ना ना मत घूम..मत घूम.. छोड़ दे.. हम सात लोग तो सुपरपावर हैं..बच जाएँगे.. ट्रेन में बाकी भी तो लोग हैं.. उनको कुछ हो गया तो.. उनका इन्स्युरेंश है भी कि नहीं..पता नहीं... इसलिए तू पीस मार.. माफ़ कर दे सबको।
बीस्ट: नहीं करेगा माफ़..मज़ाक चल रहा है..
वीडी: बीस्ट.. ऐसे नहीं......ऐसे बोल.. "मज़ाक किया गया था क्या हमारे साथ" हाहाहा
बीस्ट: उफ़्फ़्फ़..

२ मिनट बाद:

मणि: आ गया कर्जत
बीस्ट: थैंक गौड....
रजनी: उतरो सालों.. के... उतर.... सो गया क्या?
के: आगे वाला उतरेगा तब...... क्या फ़ार्ट है!!

कर्जत स्टेशन के बाहर:

रजनी(वीडी से): ताऊ कहाँ गया?
वीडी: हमको क्या पता.. स्साला...वो ट्रेन से उतरा था कि नहीं?
पीए: उतरा तो था....हमारे आगे हीं था.. उसको हम ढकेल के उतारे थे
के: अरे कहाँ रूक गए तुम लोग... जल्दी करो.. रजनी.... अरे आ जा भाई.. तेरे को हीं पता है कि कहाँ जाना है और कैसे जाना है
रजनी: कैसे जाना है? मैं यहाँ पहले थोड़े हीं आया हूँ.. पता करते-करते जाना होगा
मणि: तो तेरे को कुछ पता हीं नहीं है. ऐसे हीं प्लान बनाते रहता है.. रात के दस बज रहे हैं.... और हम लोग बिना पेंदी के लोटा के जैसे कर्जत में पहुँच गए हैं. रजनी साले... पूछ किसी से...
पीए: सालों.... वो सब बाद में सोचना...पहले ये तो देखो कि ताऊ कहाँ खो गया
बीस्ट: साला.... सही हुआ... कोई उसको किडनैप कर लिया हो तो अच्छा... एक मुसीबत तो खत्म होगा
पीए: किडनैप काहे करेगा बे..
बीस्ट: साला.....हम किडनैपर है?... जो करेगा. वही बताएगा ना कि काहे करेगा..
के: तुमको लगता है कि ताऊ को किडनैप करने वाला कोई पैदा लिया है?
रजनी: ये कौन-सी नई कहानी है..
मणि: शायद ताऊ किडनैप हो गया..
रजनी: किडनैप.. और तू आराम से बोल रहा है... तेरी फ़िलिंग्स, तेरे इमोशन्स. सिर्फ़ तेरी गर्लफ़्रेंड के लिए होते हैं क्या. लड़्की मिली नहीं कि दोस्त को पी०एस०आई मारना शुरू
मणि: पी एस आई?
पीए: पी एस आई....माने.. पहचानने से इनकार... और के...तू..तू क्या बोल रहा था कि ताऊ को कोई किडनैप नहीं कर सकता.. काहे?
के: ताऊ उसका इतना के०सी० करेगा कि किडनैपर के कान से खून निकल आएगा..
मणि: अब ये साला के०सी० क्या होता है.... ये "के" का अपना लिंगो है क्या?
रजनी: नहीं बे.. ये हर जगह का लिंगो है.. तू दूसरे लोगों से मिलेगा..बात करेगा..तो न जानेगा.
मणि: बोलोगे साले..
पीए: के सी..मतलब... कान चो*ना
वीडी: यानि कि अपनी वाणी अपनी जिह्वा से सामने वाले इंसान की कानों का बलात्कार कर देना... समझे बुरबक....
रजनी: क्या बात है कवि महोदय...हम तो आपके पंखा हो गए..
वीडी: ठीक है तो आज रात से ड्यूटी पर लग जाना... हमारे रूम में जो पंखा है वो गंदा हो गया है. उसको उतारके तुम्हीं को टाँग देंगे..
पीए: तब तो वो देख लेगा कि तुम रात भर क्या करते हो
वीडी: तो देखके करेगा भी क्या.. अकेले में हम वही करते हैं जो वो करता है या तुम करते हो.. हमारी न शादी हुई है और न गर्लफ़्रेंड है कि कुछ अलग करेंगे... हाँ ना बीस्ट..
बीस्ट: हाँ कि ना?
के: सालों.....मेरी पूरी बात सुनोगे.... बीच में अपनी रामायण शुरू कर देते हो..
वीडी: यानि कि अपना ताऊ सीता मैया है और किडनैपर रावण..यही ना..
पीए: वाह वीडी... तेरे पास भी दिमाग है.. ताऊ विल भी सो प्राउड आफ़ यू
मणि: ताऊ विल भी प्राउड आफ़ वी डी... बट वाई?
पीए: सोचो सोचो..हम पहले हीं ये बात बता चुके हैं
रजनी: तुम लोग "के" को बोलने दोगे? .. जब देखो अपनी पोथी खोलके बैठ जाते हो
वीडी: सौरी के.. कैरी औन..
पीए: वाह वीडी... तुम तो अंग्रेजी भी सीख गए..
मणि: ताऊ विल भी सो प्राउड आफ़ हिम.....यही ना? अब हम भी समझ गए.. सही है वीडी भाई.. लगे रहो
वीडी: थैंक्स.. वैसे क्या समझे तुम?
मणि: यही कि तुम भगवान राम हो... हाहाहा
पीए: ये क्या समझा बे.. चल.. कुछ भी समझा. इतना तो कन्फ़र्म हो गया कि तेरा दिमाग अभी भी काम करता है
मणि: अभी भी मतलब?
बीस्ट: मतलब कुछ नहीं... तुम काहे इनकी बातों में आ जाता है... और.. के.. तुम रूक काहे जाता है बीच में.. तुमको मैनुअली स्टार्ट करना पड़ेगा क्या कि एक्स्लेटर दबाना पड़ेगा... अभी बोलेगा....... या फिर हमसे पिटने के बाद?
के: बोलता हूँ.. बोलता हूँ.. तो होगा ये कि ताऊ किडनैपर को इतना पका देगा कि आखिर हार मानके किडनैपर उसके सामने सरेंडर हीं कर देगा... बोलेगा कि प्रभु अभी तक आप कहाँ थे? अगर आप हमें पहले मिल गए होते तो बंदूक, चाकू, रस्सी ये सब खरीदने का हमारा खर्चा हीं बच जाता.. जिसको किडनैप करना होता हम उसके पास आपको भेज देते फिर वो इंसान तो खुशी-खुशी हमारे कब्ज़े में आ जाता...
वीडी: हाहाहा.... फिर ताऊ क्या बोलेगा?
के: ये तो ताऊ से हीं पूछना पड़ेगा क्योंकि ताऊ के डायलोग्स कोई और नहीं लिख सकता.. इतनी कैपिबिलिटी किसी में नहीं है
पीए: साला.. के तो ताऊ का फ़ैन हो गया
रजनी: फ़ैन-वैन कुछ नहीं हुआ है.. ये तो अपना भड़ास निकाल रहा है.. ताऊ के सामने कुछ बोल तो पाता नहीं है.. अभी-अभी इसको मौका मिला है तो सोच रहा है कि ज़िदगी भर की बकर अभी हीं कर लें
बीस्ट: अरे सही रजनी... तुमको तो पता है कि भड़ास कैसे निकालते हैं... हम जानता है कि तुम भी ताऊ के सामने नहीं बोल पाता
मणि: बीस्ट तो सब जानता है... ..सौरी बीस्ट.. बहुत देर से कुछ बोलने का सोच रहे थे.... तुम हीं पर बोल दिए.. सौरी
वीडी: डर गया.. डर गया.... मणि डर गया

कौन मर गया बे? हम कुछ देर के लिए दो नंबर क्या गए... तुम लोग पूरा कर्ज़त माथा पे उठा लिए... - ताऊ पीछे से आते हुए
वीडी: पूरा कर्ज़त नहीं उठाए थे.. तुम जिस ट्वाईलेट में गया था.. वो ट्वाईलेट छोड़के बाकी का कर्ज़त उठाए थे और वो भी बीस्ट के माथे पे..... सौरी वहाँ तो बाल हीं नहीं.. स्लीप कर जाएगा... रजनी के माथे पे.. वैसे स्स्साले तुम जाने से पहले बता नहीं सकते थे?
पीए: हाँ ताऊ स्साले.. तुम तो हमारे आगे हीं निकले थे ...फिर सडेनली किस खोह में घुस गए..
ताऊ: कौन बोला बे?... (पी ए को देखकर) तुमको बोले नहीं थे?
पीए: कब बोले?
ताऊ: बोले तो थे कि हमारा बैग पकड़ो... लेकिन तुम तो हो हीरो.. बाल सँवारने से फुरसत मिले तो हमारी सुनोगे या फिर हमारा बैग पकड़ोगे.. स्साले कोई बंदी भी तो नहीं थी.... फिर तुम किस "माल-दर्शन" में अटक गए थे?
पीए: वाह वाह... तुम "बैग पकड़ो" कहोगे और हम समझ जाएँगे कि तुम्हें हल्का होना है... हाँ हम ये समझ रहे थे कि तुमको अपने शरीर को हल्का करना है इसलिए नहीं लिए कि हम कोई कुली हैं... "हल्का होना है" -ये तो बताना पड़ेगा ना........ और साले जब तुमको दो नंबर जाना हीं था तो ट्रेन में काहे नहीं गए.. हम लोगों का भी फ़ायदा हो जाता कि तुम्हारी बकर नहीं सुननी पड़ती... कहीं तुम हीं तो "माल-दर्शन" पे नहीं चले गए थे.... बोलो.... बोलो बे...
ताऊ: हाँ.. हम गए थे "माल-दर्शन" पर, लेकिन हम जो माल देखें वो बस हम हीं देखते हैं..तुम लोगों के लिए नहीं है..
रजनी: स्साला.. डबल मिनिंग
ताऊ: डबल मिनिंग? स्साला हम तो सिंगल मिनिंग हीं सोचके बोले थे.. दूसरा मिनिंग क्या है..
वीडी: अच्छा.... मतलब कि तुम डायरेक्टली बोले थे.. गंदे इंसान..
ताऊ: सालों.. मुँह में उंगली डालोगे तो हम प्युक हीं न मारेंगे, उल्टी हीं नहीं करेंगे.. फिर गंदा इंसान, गंदा बात ये सब तो होगा हीं
पीए: माफ़ी... ताऊ... माफ़ी... दया करो...दया
रजनी: दया... दरवाजा तोड़ दो..
के: क्या फ़ार्ट है...
मणि: अहा... सी०आई०डी०
वीडी: अरे ये भी बूझ गया.... माईंड ब्लोविंग.. तो अब अपने ग्रुप में एवरेज दिमाग बढ गया... पार्टी..
मणि: मतलब?
वीडी: लो.. और इस तरह एवरेज फिर से घट गया... मम्मी..
बीस्ट: ताऊ साले.... तुम नहीं था तो हम क्या-क्या सोच लिया था? ये तो अच्छा है कि हम लोग कहीं पता करने नहीं गया..
ताऊ: तो सालों.. इसमें मेरी गलती है... हम तो निश्चिंत थे कि हमने पीए को बता दिया है और वो तुम लोगों को बता देगा..
वीडी: पीए साला.... इसके कारण हम लोग टेंशन में आ गए.. हमारा तो सोच-सोच के डिहाइड्रेशन हो गया.. वज़न भी घट गया.
पीए: तो अच्छा है ना.. थोड़ी चर्बी घटेगी.. वर्जिश तो करते हो नहीं.. फिर ऐसे हीं वज़न घट जाए तो क्या बुरा है.. कम से कम कोई तुम्हें देखने तो लगेगी... और ताऊ के गुम होने से ये भी फ़ायदा हुआ कि "के" से एक नई कहानी सुनने को मिली।
ताऊ: कौन सी कहानी.... साला हमारे ऊपर कहानी भी बन गई.. हमको किडनैप-विडनैप तो नहीं करवा दिए ना?
के: ना.. तुमको कोई किडनैप कर सकता है... ये लोग मज़ाक कर रहा है.. कोई कहानी नहीं है।
के (पीए से, धीरे-धीरे): इसको काहे कहानी याद दिला रहे हो. फिर ये हम लोगों का कान चो* देगा.. अब ये आ गया है ना.. चला जाए।
पीए(जोर से): तो चलो.. हम कोई तुम्हारे चप्पल में फेविकोल लगाए हैं
रजनी: हाँ चलो..चलो
वीडी: रजनी.. तुमलोग गाड़ी का पता करो..तब तक.. हम आते हैं
मणि: अब एक नई मुसीबत
ताऊ: अरे ये किधर जा रहा है.. दारू की दुकान पर... अरे.. वीडी... दारू लेने जा रहा है क्या?
वीडी: नहीं
ताऊ: तो? पोस्टर देखने जा रहा है?..... साला कितना बड़ा ठर्की है...
वीडी: नहीं साले....... इंडिया-श्रीलंका का मैच चल रहा है... तुमलोग को ट्रेन में हीं न बोले थे.. उसी का स्कोर देखने जा रहे हैं
ताऊ: चलो हम भी एक बार देख लेते हैं. वहीं दारू भी ले लेंगे.. आ जाओ मणि
पीए: दारू.. काहे?.... कहाँ पीओगे..
ताऊ: मुँह में पीएँगे.... अच्छा तुम पूछ रहे हो कि किस जगह पे पीएँगे.. तो ऊपर कहीं तो जगह मिलेगा.. वहीं पर पी लेंगे
पीए: साले.. ऊपर में पी के आउट आफ़ कन्ट्रोल हुए तो सीधे नीचे हीं आओगे
ताऊ: अच्छा है ना.. वैसे भी ट्रेकिंग के बाद हमें नीचे हीं तो आना है.. हम सीधे "जी" के एक्सेलरेशन से नीचे आएँगे.
पीए: गांजा?
ताऊ: साले.. हम अपनी बात कर रहे हैं, तुम्हारी नहीं.. गंजेरी कहीं के.. फिजिक्स में नहीं पढे? "जी" माने ग्रेविटेशनल फ़ोर्स
पीए: हाँ साले... फिर ऐसी "जी" लगेगी ना.. कि जीना भूल जाओगे... और इस जी माने "ऐस" यानि कि..
ताऊ: तो तुम मत पीना.. हम तुम्हारे मुँह में थोड़े हीं ठूँसने जा रहे हैं.. अब तो भाई "सुरा" का बंदोबस्त हो गया... सुंदरी भी मिल जाती तो रात कट जाती
रजनी: ताऊ साले.... हम लोग रात भर ट्रेकिंग करने वाले हैं.. सोने वाले नहीं..
बीस्ट: रात भर चलना है? हम तो सोचा कि १-२ बजे तक पहुँच जाएगा ऊपर... फिर आराम से सोएगा..
पीए: बीस्ट.. तेरी अकेले सोने की आदत खत्म नहीं हुई अभी तक? तू ऊपर कैसे सो लेगा... ये तो भाभी जी के साथ ज्यादती होगी.. तू प्राय: ऐसा करता है क्या?
बीस्ट: पीए.. तुम्हारा खुजली कभी खत्म नहीं होता क्या.. खुजाता रहता है.. खुजाता रहता है
ताऊ: खुजली?
बीस्ट: हाँ इसके "जी" में खुजली होता है.. तभी तो हर बार बीच में टपक जाता है
मणि: हा हा... बीस्ट जब भी बोलता है.. सौलिड बोलता है
बीस्ट: रजनी साले... रात भर चलना है क्या?
रजनी: हमको क्या पता.. हो सकता है चलना पड़े..
ताऊ: तब साले... हम क्या चलते-चलते दारू पीएँगे.. हम तो नहीं जा रहे.. वहीं आस-पास कोई गाँव होगा ना, वहीं रूक जाएँगे, रात भर हम और मणि दारू पीएँगे और सुबह में मूड फ्रेश करने के बाद तुम सबके साथ पुणे लौट चलेंगे
पीए: नौटंकी मत करो.. सब लोग चलेंगे... साले.. दारू पीने के लिए यहाँ तक आए थे क्या? जाओ तुम दारू ले लो. मौका मिलेगा तो पी लेना
ताऊ: ये हुई ना दिल जीतने वाली बात.... वीडी विल भी सो प्राउड आफ़ यू
मणि: ये साला हो क्या रहा है.. ताऊ विल भी सो प्राउड आफ़ वीडी... वीडी विल भी सो प्राउड आफ़ पीए.. ये थ्री-सम चल रहा है क्या?
ताऊ: हाँ.. हाहाहा... कोई दिक्कत?
मणि: छी

वीडी(दारू की दुकान से): आओगे सालों.. मस्त मैच चल रहा है. धोनी और युवी तो पेले हुए हैं..
रजनी: अरे.. चलो.. चलो...हम भी थोड़ा देख लें
ताऊ: हाँ चलो.. हमको भी तो अपना जुगाड़ करना है
मणि: सालों... अगर मैच हीं देखने लगे तो "अंबीवाली" जाने के लिए गाड़ी कौन ढूँढेगा...
के: ऐंबीवैली?
पीए: ये क्या नाटक है... हम जाने वाले थे "कोठलीगढ" और जा रहे हैं "एंबीवैली"
रजनी: नहीं बे... एंबीवैली नहीं... अंबीवाली.. ये दूसरी जगह है. जहाँ से हमें ट्रेकिंग शुरू करनी है.. कोठलीगढ के लिए
ताऊ: स्साला... इन लोगों को कोई नया नाम नहीं मिलता क्या... हर दूसरे गाँव का नाम "अंबीवाली" हीं रख लेते हैं..
वीडी (पास आकर): तुम लोगों को इनविटेशन कार्ड भेजेंगे तब चलोगे क्या मैच देखने?
मणि: स्साला..... तुम यहाँ मैच देखने आया है?
वीडी: हाँ... हाहाहा
मणि: तुम लोगों से मुँह लगाना और गोबर में मुँह डालना बराबर हीं है
पीए: अच्छा..... एक्सपीरियंस से बोल रहे हो.... तो फिर ये बताओ कि गोबर में कितने तरह के प्रोटीन और विटामिन होते हैं?
मणि: ये क्या मज़ाक है..
पीए: तुम हीं तो बोले कि गोबर में मुँह डाले हो..... यानि कि गोबर में प्रोटीन नहीं होता यानि कि वो फ़ास्ट फूड होता है... थैंक्स फ़ार द इनफ़ोर्मेशन
मणि: हे भगवान.. कौन-से मुहूर्त में हमको पुणे भेजे थे। अच्छा चलो एक बार गलती किए पुणे भेजकर तो फिर कौन-सा मुहूर्त में हमको इन नालायकों से मिलवाए...
ताऊ: भगवान को भी तीन गलती माफ़ है क्या? तब तो वो एक और गलती कर सकता है..... क्यों बीस्ट?
बीस्ट: साला.. फिर से हमारा नाम लिया..... तुम्हारा अब टोटल पौने तीन गलती हो गया है...
ताऊ: हमको कन्फ़्य़ूजियाओ मत.... तुम तीन गलती माफ़ करता है कि दो गलती..... तीन करता है ना.... तब तो हम १ गलती और कर सकते हैं.... है ना?
बीस्ट: और अब हो गया.... टोटल पौने चार गलती... अब बच के रहना
वीडी: गुड है....
ताऊ: साले हमसे तुम्हारी क्या दुश्मनी है.. भाभी के बारे में बोलता है वीडी और गलती हमारी बढ जाती है.. रेसिस्ट साले....
पीए: रेसिस्ट?
वीडी: हाँ मोटा लोग एक रेस में आता है और पतला लोग दूसरे रेस में.... तो ये रेसिस्ट हुआ ना.....
मणि: हाहाहा..... ताऊ मखा-मखाके मचा देता है.. वेलडन ताऊ
बीस्ट: तो मणि.... तुमको अंबीवाली जाने का या उसके आगे का रास्ता पता है? रजनी.... तुमको पता है?
मणि और रजनी(एक साथ): नहीं
ताऊ: जीयो मेरे शेरों..... तुम लोगों को सर्कस से छुड़ाकर लाया कौन?
पीए: मेनका गाँधी
ताऊ: और तुमको?
वीडी: वही.... हाहाहा
रजनी: कोई बात नहीं..... हम अंबीवाली में कोई गाईड ले लेंगे।
मणि: साउंड्स गुड... साउंड़्स लाईक ए प्लान..
के: क्या फ़ार्ट है!!

आगे क्या हुआ..यह जानने के लिए पार्ट 5 का इंतज़ार करें।

-विश्व दीपक
बांटें

3 टिप्‍पणियां:

zombi ने कहा…

Vishwadeepak ji..
part-5 bahut hi zabardast bana.. it completely join the rhythm of previous parts and taken it to new ride... Tau ka character to zabardast hai... bhayanak bakar hai...
eagerly will be waiting for next part and hope it goes on.. !!
thanks for the wonderful series..

श्रद्धा जैन ने कहा…

bahut zabardast likha hai....

aage ka intezaar rahega

onkar ने कहा…

mast likha hai VDbhai!!!